Varanasi:BHU में पीपल-बरगद में सूत बांधने पर विवाद?सामने आया विद्वत परिषद,बोले ये सनातन पर आघात

Varanasi:BHU में पीपल-बरगद में सूत बांधने पर विवाद?सामने आया विद्वत परिषद,बोले ये सनातन पर आघात

Varanasi: बीएचयू में लगातार विवादों का दौर जारी है.ब्राह्मणवादी पितृसत्ता पर पूछे सवाल का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब पीपल और बरगद के वृक्ष में धागा बांधने पर पाबंदी लगाएं जानें को लेकर नया मामला अब तूल पकड़ लिया है.बीएचयू के विशिष्ट निधि विभाग के आशीष कुमार ने वीसी के नाम पत्र लिखा है.इस पत्र के जरिए वृक्षों पर धागा बांधने और उसके नीचे दीपक जलाने पर रोक लगाने की मांग की गई है.इस पत्र पर काशी विद्वत परिषद के विद्वान ने भी अब आपत्ति जताई है.

प्रोफेसर विनय पांडेय ने बताया कि पीपल का वृक्ष भगवान विष्णु का स्वरूप होता है.वहीं वट वृक्ष भगवान शिव और पाकड़ के वृक्ष में भगवान ब्रह्मा का वास होता है. हमारे शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि इसकी सेवा और पूजा करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते है.इसके पीछे इन वृक्षों के संवर्धन और संरक्षण की भावना है.

धागे से नही कर कोई नुकसान

उन्होंने बताया कि सदियों से महिलाएं वट और पीपल के वृक्ष की पूजा करती है.इसके लिए सनातन धर्म में वट सावित्री पूजा जैसे व्रत भी है.जिसमें महिलाएं वट वृक्ष की भी पूजा करती है.इस पूजा के दौरान कच्चे सूत का धागा महिलाएं इन वृक्षो पर बांधती है.कच्चे सूत का धागा काफी कमजोर होता.इससे वृक्ष को भी किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है.ऐसे में इस तरह की बातें पूरी तरह से निराधार है और ये एक तरह से सनातन धर्म पर आघात भी है.

सभी चींजों में देवी देवताओं का वास

हमारे सनातन धर्म में प्रकृति की ही पूजा होती है.नदियां,आकाश,वृक्ष,पशु,पक्षी सब में किसी न किसी देवी देवताओं का वास माना है.इससे उन सभी चींजों का संरक्षक भी होता है.हमारे सनातन धर्म में किसी भी चीज को नुकसान हो ऐसी कोई भी परंपरा नहीं है.हमारे सनातन धर्म की ये विशेषता है कि जो मनुष्य है जो सबसे पीछे है.इसके आगे सभी है इसकी हम सब इनके संरक्षण के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं.