Masane Holi:भारी विरोध के बीच महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर बंदिशों के बीच उड़े भस्म... बाबा विश्वनाथ से जुड़ी है परम्परा
वाराणसी : काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर भारी विरोध के बीच मसाने की होली खेली गई.महाश्मशान घाट पर जलती चिताओं के बीच खूब भस्म उड़ाए गए.इस होली में तांत्रिक अघोरी और घाट पर चिता जलाने वाले डोमराजा परिवार के लोग भी शामिल हुए.हालांकि इस होली में हुड़दंग को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कई बंदिशें लगाई गई थी.
प्रशासन ने डीजे पर भी रोक लगाया था और अवांछनीय तत्व इस होली तक न पहुंच सकें. इसके लिए मणिकर्णिका घाट की गलियों में जगह-जगह फोर्स भी लगाई गई थी. वहीं आयोजक समिति से जुड़े सीमित लोग शनिवार को सिर्फ मसान नाथ मंदिर में ही भस्म की होली खेली.इस दौरान डमरू के डम डम की आवाज गूंजती रही.
अदृश्य रूप में आते है बाबा विश्वनाथ
धार्मिक मान्यता है कि रंगभरी एकादशी को बाबा विश्वनाथ और माता गौरा अपने भक्तों के संग होली खेलतें है.उसके दिन दिन वो अदृश्य रूप में अपने गढ़ो के साथ होली खेलने के लिए महाश्मशान मणिकर्णिका घाट आतें है.यहां अघोरी,तांत्रिक,किन्नरों के साथ वो होली खेलतें है.आयोजक गुलशन कपूर का दावा है कि काशी के मणिकर्णिका घाट पर मसाने के होली की परम्परा सदियों पुरानी है. इसी पुरानी परंपरा का आज निर्वहन किया गया है.
न हो हुड़दंग...ड्रोन कैमरे से नजर
एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि होली में किसी तरह का हुड़दंग न हो इसके लिए घाट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम है.इसके अलावा यहां ड्रोन कैमरे से भी सभी छोटी बड़ी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है.चिता भस्म की होली को लेकर पहले ही आयोजकों को शर्तो के साथ परमिशन की सभी जानकारी दी गई थी.
काशी विद्वत परिषद ने किया था विरोध
बताते चलें कि काशी के मणिकर्णिका घाट पर होने वाली होली से पहले ही काशी विद्वत परिषद और सनातन रक्षक दल सहित अन्य संगठन इसके विरोध में थे.वें इस होली को अशास्त्रीय बता रहें थें.
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