Masane Holi:मसाने होली पर बढ़ा विवाद,सदियों नहीं बस इतने साल पहले हुई थी शुरुआत, सनातन रक्षक दल भी कूदा
वाराणसी l काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली पर विवाद बढ़ता जा रहा है.विद्वत परिषद के बाद अब इस मामले में सनातन रक्षक दल की भी एंट्री हो गई है.इसके साथ ही कई नए दावें भी अब इस होली को लेकर सामने आये है.सनातन रक्षक दल के अध्यक्ष अजय शर्मा ने कहा कि यह पंरपरा नहीं बल्कि बल्कि इवेंट है,वो भी धन उगाई का इवेंट... इसपर रोक लगनी ही चाहिए.
अजय शर्मा ने दावा है कि साल 2013 से चिता भस्म की होली की शुरुआत हुई है.उस समय कमेटी के मुठ्ठी भर लोगों ने इसे शुरू किया था.फिर इसे कुछ सालों से सैकड़ो साल पुरानी परंपरा बताई जानें लगी.अजय शर्मा ने कहा कि उन्होंने खुद 2014 में इस इवेंट के लिए 2000 रुपये चंदा दिया था.फिर 2015 में 3500 रुपये दिया.लेकिन चंदा साधु संयशियो को ठंडई पिलाने के नाम पर लिया गया.लेकिन उस पैसे से चिता भस्म की होली होने लगी.उसके बाद उन्होंने इसका विरोध किया और चंदा देना बंद कर दिया.
श्मशान महादेव के विश्राम का स्थान
अजय शर्मा ने कहा कि श्मशान महादेव के विश्राम का स्थान है.वहां जश्न मनाना होली खेलना बिल्कुल भी ठीक नहीं है.क्योंकि इस मसाने की होली में सिर्फ श्मशान घाट पर भदगी होती है.
आयोजकों के ये है दावा
हालांकि इन आरोपों के इतर मसाने की होली के आयोजकों का दावा है कि मसाने की होली सदियों पुरानी परंपरा है.कई शास्त्रों में इसका उल्लेख भी है.गुलशन कपूर ने कहा कि सिर्फ चंद लोग ही है जो इस आयोजन का विरोध कर रहें हैं. जिन्हें इसमें अतिथि,मुख्य अतिथि नहीं बनाया जाता है.
विद्वत परिषद भी कर चुका है विरोध
मसाने की होली को काशी विद्वत परिषद ने भी अशास्त्रीय बताया है.विद्वत परिषद के विनय पांडेय ने बताया कि शास्त्र में मसाने में होली खेलने की कोई परम्परा नहीं है.
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