Varanasi:सूर्य की किरणे, विशेष तिथि, बनारस के इस कुंड के चमत्कार सुन सब हैरान, विज्ञान भी फेल?
Varanasi : वाराणसी में कई सारी चमत्कारिक चींजे है. भदैनी मुहल्ले में स्थित प्राचीन लोलर्क कुंड भी उनमे से एक हैं. इस कुंड का जल एक विशेष तिथि पर अदृश्य शक्तियों से युक्त होता है. जिसके कारण लाखों दम्पतियों की सुनी गोद भर जाती है. लोग ज़ब आइवीएफ से भी आस छोड़ देते हैं उस समय में उनकी उम्मीदों को बस इसी चमत्कार का ही सहारा मिलता हैं,एक्सपर्ट भी इस बात को मान चुकें हैं.
90 के दशक में बीएचयू के रिसर्चर और प्रोफेसर की एक टीम ने लोलार्क कुंड पर बकायदा एक स्टडी किया था.इस स्टडी में ये चौकाने वाला सच सामने आया की एक विशेष तिथि पर इस कुंड के जल में अदृश्य शक्तियां होती हैं. इस समय में ज़ब भी कोई दम्पति इस कुंड में स्नान करता है तो संतान प्राप्ति की उसकी ये कामना पूरी हो जाती हैं.ये तिथि होती है भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि जिसे लोलार्क छठ के नाम से जाना जाता है.
60 फीसदी तक सफलता
इस स्टडी में बीएचयू के प्रोफेसर प्रवीण सिंह राणा ने ये भी पाया की जो भी दाम्पति इस कुंड में लोलार्क छठ के दिन स्नान करता है. उनमें से 60 फीसदी दम्पतियों को कुछ साल में ही संतान सुख की प्राप्ति हुई है.इस कुंड के ऊपर ही लोलाकेश्वर महादेव का मंदिर भी है.इसी स्थान पर भगवान सूर्य ने शिवलिंग की स्थापना कर उनकी तपस्या की थी. धार्मिक मान्यता है की सूर्य की पहली किरण सबसे पहले इसी कुंड के जल पर पड़ती है.
संतान प्राप्ति के लिए दम्पति करते है स्नान
मंदिर के पुजारी कुंदन त्रिपाठी ने बताया की इस कुंड को सूर्य कुंड भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है की इस कुंड में स्नान से माताओं की सुनी गोद भर जाती है और उन्हें संतान प्राप्ति का सुख मिलता है. इसके आलावा चर्म रोग से मुक्ति के लिए भी भक्त यहां स्नान करते हैं.
गिरा था भगवान सूर्य का रथ
धार्मिक कथाओं के अनुसार,इसी स्थान पर भगवान सूर्य के रथ का पहिया गिरा था. जिससे यहां कुंड का निर्माण हुआ. इस कुंड का इतिहास गुप्त काल से जुड़ा हुआ है.9 वीं शताब्दी में गहरवार के राजा ने इसका जीर्णोद्धार कराया था फिर 18 वीं शताब्दी में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने इसका निर्माण कराया जो स्वरूप आज भी देखने को मिलता है.
जो सुनी माताओं की गोद भरती हैं.
लोलार्क कुंड में स्नान
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